INDIAN HISTORY

                                   EAST INDIA  COMPANY




ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी  कंपनी को जॉन कंपनी के नाम से भी जाना जाता था। इसे ब्रिटैन की महारानी ने भारत के साथ व्यापर करने के लिए २१ सालो तक छूट दे राखी थी। बाद में कंपनी ने लगभग सभी क्षेत्रो पर  अपने सैनिक तथा प्रशासनिक अधिपत्य जमा लिया। १८५७ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम यानि सिपाही विद्रोह के बाद सन १८५८ में इसका विलय हो गया।

जब १८५७ का विद्रोह हुआ तब ईस्ट इंडिया कमपनी के का अंत दिखाई देने लगा। और भारत  के प्रति  सर्कार की नीतियों में काफी बदलाव दिखने लगे।   जिसके अंतर्गत भारत के राजाओ ,सरदार और जमीन्दारोंको अपनी साथ मिलकर ब्रिटिश  शाशन को सुधरने की कोशिश की गयी. रानी विक्टोरिया के ०१ नवंबर १८५८ की घोषणा  के अनुसार यह उद्देशित किया गया की। इसके बाद भारत का शाशन ब्रिटिश राजा के द्वारा और उनके सक्रेटरी ऑफ़ स्टेट द्वारा चलाया जायेगा। गवर्नल जनरल को वॉयसरॉय की पदवी दी गयी। जिसका यह  अर्थ था की वह राजा का प्रतिनिधि था.  विक्टोरिया जिसका अर्थ था की वह साम्राग्नि  की पदवी धारण करे। और इसी तरह भारत में ब्रिटिश सारकर की दखल अंदाजी शुरू हो गयी.

क्लाइव को भारत में कंपनी का गवर्नर नियुक्त किया गया 

प्लासी की लड़ाई १७५७ में कंपनी ने रॉबर्ट क्लाइव के तहत जीत और १७६४ बक्सर की लड़ाई (बिहार में )में एक और जीत, कंपनी की शक्ति मजबूत हुई ,और सम्राट शाह आलम यह दीवान की नियुक्ति द्वितीय ,और बंगाल का राजस्व कलेक्टर ,बिहार और उड़ीसा ,कंपनी इस तरह १७७३ से निचा गंगा के मैदान के बड़े क्षेत्र के वास्तविक शासक बन गए। यह भी डिग्री से रवाना करने के लिए बम्बई और मद्रास के आसपास अपने उपनिवेश का विस्तार। एंग्लो म्हैसूर युध (१७६६-१७९९)और एंग्लो मराठा युधा (१७७२-१८१८)के सतलज नदी के दक्षिण भारत के बड़े क्षेत्रो के नियंत्रण स्थापित किया। 


राजा राम मोहन रॉय 



स्वतंतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व राजा राम मोहन रॉय बाकिमचन्द्र और विद्यासागर जैसे सुधारवादियों ने किया। इसी तरह ब्रिटिश सर्कार के खिलाफ संगर्ष आगे बढ़ता गया. राजा राम मोहन रॉय ने १७७२ से १८३३ तक समाज को बुरी प्रथाओसे मुक्त कार्नर का काम किया। विधवा विवाह स्त्री कायदा ,उन्होंने सती बाल विवाह और ब्रम्ह समआज की स्तापना की.विधवा विवाह स्त्री शिक्षण कायदा और भारत में अंग्रेजी पढ़ती से शिक्षा दिए जाने का उन्होंने समर्थन किया और उनके ही प्रयासों के कारन ब्रिटश शाशन द्वारा सटी होने को एक क़ानूनी अपराध घोषित किया गया।

स्वामी विवेकानंद



स्वामी विवेकानंद १८६३से १९०२ जो रामकृष्ण परमहंस के शिष्य अनुयायी थे १८९७ में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। उन्होंने वेदान्तिक दर्शन की सर्वोचता का समर्थान किया. १८९३ में शिकागो की विश्व धर्म कांफ्रेंस में उनके भाषण ने पहली बार पश्चिमी लोगो को  धर्म की महानता को समझाया।



क्विज

ब्रम्हा समाज की स्तापना किसने की थी ?
रामकृष्ण मिशन की स्थापना किसने की थी ?

1 Comments