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Hava Mahal Information English


Hawa Mahal is the Alishan Mahal located in Jaipur, India. In fact, it is a wall with a large cover that was primarily meant for women of the royal family. So that he can take the joy of festivals and utilities on the road from inside the palace as he was not allowed to go outside. This fort is constructed with red and pink stones, this palace is situated on the side of the City Palace and extends to the ladies' chamber. This palace was built by Maharaja Sawai Pratap Singh in 179, the design of the palace was designed by Lal Chand Ustad as the crown of Hindu Goddess Shri Krishna.



This palace has a unique five-storey exterior, a honeycomb of honey bees, which has 953 small windows, also known as Jharokha. Unique latticework has been done in the windows. The main reason for installing these lattices was that Rania of the palace could see the everyday life of Bahar as she could not go out because the curtain practice was in place then. Because of these waters, cold air is circulated in the inner part of the palace complex. And at the same time, the high temperature of summer makes the entire area air-conditioned. This palace is a five-storey pyramid shaped monument which is 50 feet from its base. 


It reflects the situation of the group of Ardhkonia section, making this monument a unique face. The internal complex behind the building of the palace has rooms built with pillars as needed. And the corridors are designed with light decoration. By which the top floor is reached. The Bhitaal of Hawa Mahal has several rooms made of different colored stones, assisted by gold water and a fountain which is located in the center of the courtyard. This unique structure was actually given by Lala Chand Ustad. Entrance to the Hawa Mahal from the City Palace is through a royal door. This door opens into a large courtyard, surrounded by lofty storey buildings. Which is connected to the eastern part of Hawa Mahal. There is also an archaeological museum in the courtyard of the palace. Hawa Mahal was also known as Raja Jai ​​Singh's chef d'oeuvre. This palace was his favorite shelter because the elegant design and its internal construction were done in an attractive way outside. The cool air in the palace chambers reaches through its small windows. Which is extended by fountains built in the center of each fort. The upper two floors of Hawa Mahal can be reached by a ramp. The Archaeological Department of Rajasthan maintains this palace.

हवा महल जानकारी हिंदी 

हवा महल भारत के जयपुर में स्थित आलिशान महल है। वास्तव में यह एक विशाल आवरण वाली एक दिवार है जिसे मुख्या तौर पर शाही परिवार की औरतो के लिए था। ताकि वह सड़क पर हो रहे त्योहार और उतसवो का आनद महल के अंदर से ही ले सके क्योंकि उन्हें बहार जाने की अनुमति नहीं थी। इस किले का निर्माण लाल और गुलाबी पथरो से किया गया है, यह महल सिटी पैलेस के किनारे स्थित है और महिलाओंके कक्ष तक फैला हुआ है। इस महल का निर्माण  १७९९ में महाराज सवाई प्रताप सिंह ने करवाया था महल का डिज़ाइन लाल चाँद उस्ताद ने हिन्दू देवी देवता श्रीकृष्ण के मुकुट रूप में बनाया था। 

इस महल अनोखा पांच मंजिली बाहरी भाग मधुमखियोंकी के शहद के छत्ते की भर्ती लगता है जिसमे ९५३ छोटी खिड़किया है जिन्हे झरोखा भी कहा जाता है। खिड़कियों में अनोखा जाली काम किया गया है इन जाली को लगाने का मुख्य कारन यह था की महल की रानिया बहार की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी को देख सके क्योंकि वह बहार जा नहीं सकती थी क्योंकि तब पर्दा प्रथा लागु थी। इन जलियोंकी वजह से महल परिसर के भीतरी भाग में ठंडी हवा का संचार होता है। और साथ ही गर्मियों की उच्चा तापमान में पुरे क्षेत्र को एयर कंडीशनिंग कर देता है।
यह महल एक पांच मंजिला पिरामिड आकर की स्मारक है जो इसके आधार से ५० फ़ीट है महल की ऊपरी तीन मंजिलो की संरचना का परिमाप एक रूम की चौड़ाई की बराबर है। 


ये अर्धकोनिया खंड के समूह की   परिस्थिति को दर्शता है  इस स्मारक को अनोखा मुख बना देता है। महल की ईमारत के पीछे के आतंरिक परिसर में जरुरत के मुताबिक कमरों का खम्बो के साथ निर्माण किया गया है। और गलियारों को हलकी सजावट के साथ बनाया गया है। जिनके द्वारा सबसे ऊपरी मंजिल तक पहुंचा जाता है। हवामहल के भीताल अलग अलग रंगो के पत्थर से बने कई कमरे ,सोने के पानी द्वारा मदद और एक फ़व्वारा जो आँगन के केंद्र में स्थित है। इस अनूठी संरचना को वास्तव रूप लाला चाँद उस्ताद ने दिया था। 

सिटी महल से हवा महल में प्रवेश एक शाही दरवाजे के माध्यम से किया जाता है। यह दरवाजा एक विशाल आँगन में खुलता है जिसके तीनो तरफ दुबले मंजिला इमारते है। जो हवा महल के पूर्वी भाग से जुडी हुई है। महल के आँगन में एक पुरातत्व संग्रहालय भी है। हवा महल को राजा जय सिंह के शेफ डी oeuvre  के नाम से भी जाना जाता था। यह महल उनका सबसे प्रिय आश्रय इसलिए था क्योंकि आलिशान प्रारूप और इसका आतंरिक निर्माण बाहर आकर्षक तरीके से किया गया था। महल के कक्षों में शीतल हवा इसके मुख बानी छोटी खिड़कियों द्वारा पहुँचती है। जिसे प्रत्येक ककसो के केंद्र में बने फव्वारों द्वार बढ़ाया जाता है। हवा महल की ऊपरी दो मंजिलो तक रैंप द्वारा पहुंचा जा सकता है। इस महल की देख रेख का काम राजस्थान का पुरातत्व विभाग करता है। 



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